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प्रेस रिलीज: 22 अक्टूबर 2018

आप ने जारी किया 20 सूत्री आदिवासी घोषणापत्र

आदिवासी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं मिलें और 5वी अनुसूची का हो कड़ाई से पालन: आलोक अग्रवाल

आदिवासियों के अधिकार से संबंधित कानून तो हैं, लेकिन नहीं होता उनका पालन: विजय पांडा

भोपाल, 22 अक्टूबर। आम आदमी पार्टी ने गांधी भवन में आज आदिवासी घोषणा पत्र जारी किया । अपने 20 सूत्री आदिवासी घोषणा पत्र में आप ने 5वीं अनुसूची का कड़ाई से पालन करने और आदिवासी इलाकों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे सामने रखे हैं। (पूरा घोषणापत्र संलग्न है)

इस कार्यक्रम में भारत जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वयक विजय भाई पांडा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आप के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने की। इस दौरान आप के आईटी प्रमुख अरविंद झा भी मौजूद थे।

श्री अग्रवाल ने कहा कि देश में आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित होने चाहिए। संविधान की पांचवीं अनुसूची, 1996 का पेसा कानून और 2006 में बनाया गया वन अधिकार अधिनियम का तत्काल अक्षरश: पालन होना चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनी, तो प्राथमिकता पर आदिवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए इन कानूनों को अक्षरश: लागू किया जाएगा। आजादी के बाद भाजपा और कांग्रेस की कई सरकारें बनीं और इन सरकारों ने आदिवासियों से कई वादे भी किए, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। अब वादों से मुकरने की यह बाजीगरी नहीं चलेगी। आदिवासी समाज संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि अगर मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार बनती है तो पांचवीं अनुसूची, पेसा काूनन और वन अधिकार अधिनियम को लागू किया जाएगा और हर आदिवासी परिवार को पट्टे दिए जाएंगे।

श्री विजय पांडा ने कहा कि आज देश में आदिवासी समुदाय की बेहतरी के लिए कई कानून हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है। दूसरे वनोपज से लेकर पेसा जैसा कानून है जो बहुत अच्छा है, लेकिन आज आदिवासी की बात को कोई नहीं सुन रहा। उन्होंने कहा कि इंसान और जानवर बरसों से साथ रहते आये हैं, लेकिन विकास के नाम पर विस्थापन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को अधिकार दिए जाये तो इंसानों को जंगल में जानवरों और प्रकृति के साथ मिलकर रहने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

आदिवासी घोषणा पत्र

1. आदिवासी क्षेत्रों में सभी मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराया जायेगा।

2. संविधान की 5वीं अनुसूची का कड़ाई से पालन किया जायेगा।

3-अ)वन अधिकार कानून 2006 के तहत सभी आदिवासियों को काबिज जमीन के पट्टे दिए जाएंगे।
ब) वन अधिकार कानून, 2006 एवं संशोधित नियम, 2012 के सामूहिक अधिकार (प्रारूप ‘ख’ एवं प्रारूप ‘ग’) को तुरंत कार्यान्वयन कर के ग्राम सभा को लघु वनोपज पर मालिकाना हक्क (तेंदूपत्ता सोसाइटी भंग कर), महाराष्ट्र के तर्ज़ पर ग्रामसभा को टी.पी इशू करने की अधिकार;सारे वनोग्रामों को राजस्व ग्राम तथा अति आदिमजाति के बसाहट (हैबिटैट राइट्स) अधिकार को तुरंत कार्यकारी करेंगे।

4. वनोपज को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून में शामिल कर लाभकारी दाम सुनिश्चित किया जाएगा और इस दाम के नीचे की कोई भी खरीदी गैर कानूनी होगी।

5— पेसा कानून, 1996 कानून को कड़ाई से लागू किया जाएगा।
अ) पेसा कानून, 1996 का नियम वनाकर एवं इसकी धारा 4(क), 4(घ) एवं 4(ढ)की भावना के तहत ग्रामसभा को सही अर्थ में सर्वोच्च एवं सक्षम बनायेगे।
ब) पेसा कानून, 1996 के तहत मध्य प्रदेश में 1997 में वनाए गए कुछ प्रावधानों को लुप्त कर दिए गए उसमे सुधार करेंगे।
स) पेसा कानून, 1996 धारा 4(ण) के तहत प्रदेश की अनुसूचित क्षेत्र में स्वशासी ज़िला परिषद बनाने की कानून बनायेगे।

6. भारत सरकार की 1974 की सर्कुलर का मद्देनजर मध्यप्रदेश में गैर अनुसूचित आदिवासी क्षेत्र को अनुसूचित तथा जो आदिवासी अब तक अनुसूचित जनजाति मे अंतर्भुक्त नहीं किये गए है, उन्हें जोड़ा जायेगा।

7. संविधान का 5वी अनुसूची की ‘शांति’ एवं ‘सुशासन’ की बात तथा पेसा कानून का 4(घ) को मद्देनजर आदिवासियों की पारंपरिक न्याय व्यवस्था को मान्यता दे कर स्पस्ट कानून बनाये जाए।

8. संविधान की 5वी अनुसूची की भाग (ख) पेरा 4 के तहत जनजाति मंत्रणा परिषद् को पुनर्गठित करके कानून की सही अर्थ से सदस्यों की चयन में बहुदलीय प्रतिनिधि व्यवस्था की तर्ज़ पर तथा समाज के बुद्धिजीवी या आदिवासी विषयों पर जानकर व्यक्तियों की प्रतिनिधित्व कायम करें एवं जनजाति मंत्रणा परिषद् की सभापति मुख्यमंत्री न हो कर सदस्यों द्वारा चुने गए सदस्य की सभापतित्व की कानूनी व्यवस्ता लागू करेंगे।

9. 5वी अनुसूची का भाग ‘ख’ की पेरा 5(2)(ग) के भावना की तहत, पेसा कानून, 1996 की धारा [4ड(v)], संविधान की अनुच्छेद 275 परन्तुक के तहत तथा माननीय उच्चतम न्यायलय की 2018 की फैसला के तहत आदिवासियों के ऊपर कोई भी क़र्ज़ पर ग्राम सभा की अनुशंसा पर तुरंत कारवाही होने की प्रशासनिक व्यवस्था की जायेगी।

10. आदिवासी उपयोजना के तहत उचित धन राशि मुहैया कर, बिना कोई डायवर्सन करें तथा संविधान का अनुच्छेद 275 परन्तुक को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित क्षेत्र में उत्तम शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर खर्च होने की व्यवस्था की जाएगी।

11. आदिवासी क्षेत्रों में बिना सहमति कोई विस्थापन नहीं होगा। संविधान का 5वीं अनुसूची के पेरा 5(2) की भावना के तहत अनुसूचित क्षेत्र में भू-हस्तांतरण एवं भू-अधिग्रहण पर नियंत्रण के लिये कानूनी प्रावधान किया जायेगा। जिन क्षेत्रों में आदिवासियों से ले ली गई जमीन का 5 वर्ष से अधिक से उपयोग नहीं हुआ है, उन आदिवासी परिवारों को जमीन वापस की जाएगी।

12. आदिवासियों के सभी सामाजिक, सांस्कृतिक आधिकारों व परंपरागत रीति रिवाजों का सम्मान व सुरक्षा की जाएगी और सभी आदिवासी ब्लॉक में संग्रहालय खोले जाएंगे।

13. प्रदेश के सभी आदिवासी ब्लॉकों में बंद पड़े छात्रावासों को शीघ्र चालू कराया जाएगा एवं ब्लॉक स्तर पर 100 छात्र व 100 छात्राओं, तहसील स्तर पर 200 छात्र व 200 छात्राओं एवं जिला स्तर पर 500 छात्र व 500 छात्राओं व संभाग स्तर पर 1000 छात्र व 1000 छात्राओं के लिए नए छात्रावास बनाए जाएंगे, जिसमें लाइब्रेरी, मैस, वाई फाई की सुविधा दी जाएगी।

14. प्रदेश के सभी आदिवासी ब्लॉकों में आधुनिक स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स खोलने के साथ साथ आधुनिक तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र खोलकर आदिवासियों को खेल में उच्च स्थान पर पहुंचने का अवसर दिया जाएगा।

15. प्रदेश के सभी आदिवासी ब्लॉकों के प्रत्येक ग्रामों में 10 नवीन तालाबों का निर्माण कर पानी संग्रहण को बढ़ावा देकर मछली पालन के लिए सरकार द्वारा विशेष फंड की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही पुराने तालाबों के गहरीकरण एवं मरम्मत जल्द से जल्द की जाएगी।

16. प्रदेश के सभी बेरोजगार आदिवासी युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण कर सभी बेरोजगारों के लोन की बैंक गारंटी, दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की तरह, सरकार लेगी। अनुसूचित क्षेत्रों से निकालने वाली खनिज संपत्ति से अर्जित आय/राजस्व का 30 प्रतिशत क्षेत्रीय ग्रामसभा को गांव के विकास के लिए दिया जाएगा।

17. आदिवासी विकास के लिए आर्टिकल 275 के अंतर्गत ट्रायबल सब प्लान के लिए पैसे का उपयोग आदिवासियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, कुपोषण आदि जैसी मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए ही किया जाएगा।

18. मध्य प्रदेश में ऐसे क्षेत्र जो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं, लेकिन अनुसूचित क्षेत्र में शामिल नहीं हैं उनकी समीक्षा कर उन्हें अनुसूचित क्षेत्र में शामिल किया जाए जैसे धार का बदनावर, जबलपुर का कुंडम एवं अन्य क्षेत्र।

19. आदिवासियों की जमीन का हस्तांतरण रोकने के लिए आंध्रा एवं तेलंगाना भू राजस्व संहिता (अनुसूचित क्षेत्र पर) की धारा 1/70 की तर्ज पर मध्य प्रदेश में क़ानून बनाएंगे।

20. अनुसूचित क्षेत्र की शहरी इलाके के लिए भूरिया समिति के दूसरी रिपोर्ट पर कानून बनाएं एवं 1993 से चली आ रही गैर संविधानिक (अर्थात अनुच्छेद 243 z c के विरूद्ध) कार्य को पूर्ण रूप से खारिज कर भूतलक्षि प्रभाव से लागू किया जाए।

मीडिया सेल
आम आदमी पार्टी, मध्यप्रदेश

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sudhir