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प्रेस रिलीज: 7 अगस्त 2018

एमबी पॉवर से सरकार ने किया है। गैरकानूनी समझौता, ऐसे में टैरिफ निर्धारण का सवाल ही नहीं: आलोक अग्रवाल

आम आदमी पार्टी ने एमबी पॉवर की टैरिफ निर्धारण याचिका पर लगाई विद्युत नियामक आयोग में आपत्ति

आयोग के राज्य कार्यालय के समक्ष किया प्रदर्शन, सुनवाई में प्रदेश अध्यक्ष ने सामने रखे तथ्य, कहा- खारिज हो समझौता

भोपाल, 7 अगस्त। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल ने मंगलवार को मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष एम. बी. पॉवर ( मध्यप्रदेश ) के बिजलीघर अनूपपुर यूनिट क्रमांक 2 के टैरिफ निर्धारण (बिजली की रेट निर्धारित करने) पर जन सुनवाई के दौरान आपत्ति दर्ज की।

उन्होंने कहा कि चूंकि एमबी पॉवर ने विद्युत गृह की इकाई 2 से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद पहली बार अंतिम टैरिफ निर्धारण चाहा हैं और पहली जनसुनवाई हो रही है। इसलिए सबसे पहले 5 जनवरी 2011 को किए गए समझौते की वैधानिकता पर सबसे पहले निर्णय चाहिए और इस बिजली खरीद अनुबंध को रद्द करने का आदेश दिया जाए। जब यह समझौता ही गैरकानूनी है, तब यूनिट 2 के टैरिफ निर्धारण का सवाल ही नहीं उठता है।

कांग्रेस-भाजपा के गठजोड़ के खिलाफ किया प्रदर्शन
इससे पहले आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश शासन, शिवराज सिंह चौहान एवं कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा-कांग्रेस की बिजली लूट के खिलाफ नारेबाजी की गई। इस प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल के अलावा प्रदेश सचिव दुष्यंत दांगी, भोपाल लोकसभा प्रभारी नरेश दांगी, राष्ट्रीय परिषद की सदस्य मंजू जैन, उत्तर विधानसभा के पार्टी के उम्मीदवार जुबैर खान, जिला महिला शक्ति संयोजिका रीना सक्सैना, मध्य विधानसभा प्रत्याशी फराज खान, नरेला विधानसभा प्रभारी रेहान जाफरी, गोविंदपुरा विधानसभा प्रभारी मनोज पाल, हुजूर विधानसभा प्रभारी धीरज गोस्वामी, एमएस खान, अमीन राजा, हाशिम अली, अरविंद शर्मा, फहीम खान, विवेक मिश्रा, दिलीप पटेल, कृष्णकांत पाटिल, शमा बाजी, लक्ष्मी, माया विश्वकर्मा, गोपाल दादा, फिरोज अख्तर, ओम प्रकाश, जिया खान, रियाज खान, कमर खान, संजय तिवारी, भोजराज, राम लखन आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे

गैरकानूनी, जनता के हितों के विरुद्ध और अवैधानिक है समझौता: आलोक अग्रवाल
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शासन की ओर से 4 जून 2008 को किए गए समझौते (एमओयू) में शर्त थी कि निजी विद्युत कंपनी से खरीदी जाने वाली 30 प्रतिशत बिजली की दर संबंधित विद्युत नियामक आयोग अनुमोदित करेगा। यह इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 63, टैरिफ पॉलिसी 2006, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग कर विद्युत खरीदी हेतु शर्तें अधिनियम 2004 एवं भारत सरकार के स्पष्टीकरण दिनांक 9 दिसंबर 2010 के अनुरूप एक मात्र प्रतिस्पर्धात्मक बोली से खरीदने की अनिवार्यता को दर्शाता हैं, लेकिन तत्कालीन मध्यप्रदेश पॉवर ट्रेडिंग कंपनी ने उक्त सभी अधिनियमों की अवहेलना कर बिजली लागत तथा उस पर लाभ के आधार पर 5 जनवरी 2011 को एम बी पॉवर से अनुबन्ध किया और उसी आधार पर उपरोक्त संदर्भ में टैरिफ निर्धारण चाहा है, जो पूर्णत: गैरकानूनी, अवैधानिक व जनता के हितों के विरुद्ध है।

श्री अग्रवाल ने आयोग की सुनवाई में कहा कि याचिकाकर्ता एम बी पॉवर और तत्कालीन मध्यप्रदेश पॉवर ट्रेडिंग कंपनी का बिजली खरीद समझौता संदेहास्पद एवं पूरी तरह गलत है, क्योंकि समझौते में एक पुष्टिकर्ता पक्ष मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जिस अधिकारी श्री गजरा मेहता मुख्य इंजीनियर (वाणिज्य ) के हस्ताक्षर हैं, उनकी पदस्थापना ही 31 जनवरी 2011 को हुई है।

कांग्रेस है साझीदार बिजली की लूट में
अनूपपुर में एमबी पॉवर लिमिटेड कंपनी की परियोजना के संबंध में सामने आए तथ्यों से साफ है कि इस परियोजना के संबंध में शिवराज सरकार द्वारा गैरकानूनी समझौता किया गया, जिसके कारण गत तीन वर्षों में मध्य प्रदेश की जनता को 585 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस कंपनी का संबंध कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष श्री कमलनाथ जी के परिवार से रहा है और शायद यही कारण है कि श्री कमलनाथ ने सन 2011 में कंपनी बनने के बाद पिछले 7 साल में कभी भी इस गैरकानूनी समझौते के बारे में आवाज नहीं उठाई है। इससे साफ होता है कि प्रदेश में बिजली की हो रही लूट में भाजपा और कांग्रेस साझीदार हैं।

क्या है मामला
एमबी पॉवर लिमिटेड कंपनी से राज्य सरकार का 5 जनवरी 2011 में समझौता हुआ। केंद्र सरकार की 6 जनवरी 2006 की टैरिफ पॉलिसी के अनुसार कोई भी समझौता केवल प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से ही हो सकता था। परंतु राज्य सरकार ने इस नियम का खुला उल्लंघन करते हुए एमबी पॉवर लिमिटेड के साथ समझौता किया। दूसरा गंभीर मुद्दा यह है कि 5 जनवरी 2011 को समझौता करने वाले मुख्य अभियंता श्री गजरा मेहता उक्त तिथि को उस पद पर पदस्थ ही नहीं थे। दस्तावेजों से साफ है कि उनकी उक्त पद पर पदस्थापना 31 जनवरी 2011 को हुई है। अत: निश्चित रूप से ये गैरकानूनी समझौता हुआ और इसके कारण 2015 से 2018 के बीच इस परियोजना की बिजली महंगी होने के कारण मध्य प्रदेश की जनता को 585 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

कमलनाथ से कैसे है संबंध
एमबी पॉवर कंपनी मोजरवियर कंपनी द्वारा विशेष रूप से बनाई गई कंपनी है। मोजरवियर कंपनी में श्री कमलनाथ के जीजा दीपक पुरी कंपनी के चैयरमैन हैं और उनकी बहन नीता पुरी और उनके भांजे रातुल पुरी भी कंपनी में शामिल हैं। साथ ही कमलनाथ जी के भांजे रातुल पुरी एमबी पॉवर के डॉयरेक्टर हैं। मोजरवियर कंपनी में कमलनाथ जी खुद भी शेयरधारक हैं। कमलनाथ जी के चुनाव आयोग में दिए गए शपथ पत्र के अनुसार कंपनी में उनके 6450 शेयर हैं। अत: स्पष्ट रूप है कि कमलनाथ जी के परिवार का एमबी पॉवर से सीधा संबंध है और शायद यही कारण है कि श्री कमलनाथ ने पिछले 7 साल में कभी इस गैरकानूनी और प्रदेश की जनता को लूटने वाले समझौते का विरोध नहीं किया।

मीडिया सेल
आम आदमी पार्टी, मध्य प्रदेश

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sudhir