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प्रेस रिलीज: 5 अगस्त 2018

बदलाव की नीयत हो, तो सरकारें बहुत कम समय में कर सकती हैं कायापलट: आतिशी मार्लेना

आप नेता ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर बोला तीखा हमला

प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कैग की रिपोर्ट के हवाले से बताई प्रदेश में शिक्षा की जमीनी स्थिति

भोपाल, 5 अगस्त। अगर देश की कोई सरकार वास्तव में बदलाव लाना चाहे, तो बहुत कम समय में ऐसा किया जा सकता है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसका उदाहरण पेश किया है। काम करने में पैसे की कमी आड़े नहीं आती है। सरकारों के पास पर्याप्त पैसा है, जरूरत है इसके सही और ईमानदार इस्तेमाल की। अगर कोई सरकार कहती है कि उसके पास शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं को विश्व स्तरीय बनाने का पैसा नहीं है, तो वह झूठ बोलती है। यह बात आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय पीएसी (पॉलिटिकल अफेयर कमेटी) की सदस्य और वरिष्ठ नेता आतिशी मार्लेना ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। इससे पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांतिकारी कार्य हुआ है, उसमें आतिशी जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दूसरी ओर हमारे मध्य प्रदेश में पिछले 15 साल में शिक्षा की स्थिति बेहद खराब हो गई है। सीएजी की रिपोर्ट के आंकड़ों के साथ उन्होंने बताया कि प्रदेश में आठवीं पास 84 प्रतिशत बच्चे 1 से 9 तक के अंक नहीं पढ़ पाते। 51 प्रतिशत बच्चे सामान्य हिंदी नहीं पढ़ पाते। पिछले पांच साल में 42 लाख बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 65 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। 18 हजार स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है। जबकि शिक्षा गारंटी कानून कहता है कि किसी स्कूल में एक शिक्षक नहीं हो सकता है।

आम आदमी पार्टी ने झुठलाया है आम सोच को: आतिशी
दिल्ली के शिक्षा सुधारों पर बात करते हुए सुश्री आतिशी ने कहा कि देश भर में सरकारी स्कूलों की हालत किसी से छिपी नहीं है। देश भर में सरकारी स्कूल अपने जर्जर हालात के लिए खबरों में आते हैं। कहीं बिल्डिंग बदहाल है, तो कहीं छत टपकती है, तो कहीं मिड डे मील उपलब्ध नहीं है। हम सभी ने पिछले सालों में यह मान लिया है कि सरकारी स्कूल ठीक नहीं हो सकते हैं, इसीलिए गरीब से लेकर मध्य वर्ग तक के अभिभावक अपने बच्चों को जैसे तैसे प्राइवेट स्कूलों में भेजने का जतन कर रहे हैं। लेकिन पिछले साढ़े तीन साल में दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस ट्रेंड को झुठला दिया है और दिखा दिया है कि अगर कोई सरकार सरकारी स्कूलों की हालत को बदलना चाहे तो वह बहुत कम समय में ऐसा कर सकती है।

शिक्षा के लिए दिल्ली सरकार के चार काम
बजट आवंटन: दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में सबसे पहला काम इसका बजट बढ़ाकर किया था। आज मध्य प्रदेश को ही देखें तो कुल बजट का 9 प्रतिशत शिक्षा को जाता है, जबकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो उसने शिक्षा के बजट को दोगुना करके 25 प्रतिशत किया। अभी यह बढ़कर 26-27 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस तरह आज बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है। बजट बढ़ाने के कारण हम स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक कर पाए हैं। 20 साल से केंद्र सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के नाम पैसा खर्च किया है, लेकिन जो बिल्डिंग बनती हैं, उनकी गुणवत्ता काफी खराब रही है। दिल्ली सरकार ने पहले दो सालों में ही 8000 नए कमरे बनाए और 12 हजार कमरे और बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा 21 नए स्कूल खोले और 31 स्कूल अभी बनाए जा रहे हैं। नए स्कूल और कमरों की संख्या को देखें तो दिल्ली सरकार अब तक करीब 600 स्कूलों की कैपेसिटी बढ़ा चुकी है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग में ब्लैकबोर्ड, डेस्क, लैब आदि की गुणवत्ता को बढ़ाया गया है और आज सरकारी स्कूल की हालत प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले कहीं कमतर नहीं है।

शिक्षकों की ट्रैनिंग: दिल्ली की सरकार ने शिक्षकों की ट्रेनिंग के बजट को 10 गुना बढ़ाया है। कांग्रेस सरकार के समय ट्रेनिंग पर 10 करोड़ रुपए खर्च किए जाते थे, जिसे आप सरकार ने बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए किया है। आज दिल्ली के शिक्षक आईआईएम लखनऊ, आईआईएम अहमदाबाद से लेकर विदेशों में कैम्ब्रिज और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में तक ट्रैनिंग लेने के लिए जाते हैं। अगर शिक्षकों को बेहतर ट्रेनिंग दी जाती है, तो वही शिक्षक बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकते हैं।

कांट्रेक्ट टीचर: मध्य प्रदेश की तरह दिल्ली में भी कॉन्ट्रेक्ट शिक्षक की समस्या थी। पहले की सरकारों ने सालों से परमानेंट नियुक्तियां नहीं की थीं। आम आदमी पार्टी ने तय किया कि सभी शिक्षकों को पक्का करेगी, लेकिन एलजी साहब के कारण वह अटका हुआ था। फिर भी आप सरकार के अधिकार क्षेत्र में उन शिक्षकों का वेतन था, तो हमने उसे बढ़ाकर देश भर में सबसे अधिक किया। आज दिल्ली में गेस्ट टीचर्स की सेलरी जो पहले 14 हजार से 16 हजार रुपए मिलती थी, उसे बढ़ाकर 32 से 35 हजार रुपए किया गया है। यह देश में सबसे अधिक है। आज गेस्ट टीचर्स को भी ट्रैनिंग मिल रही है, उन्हें सारी एक्टिविटीज में शामिल किया जा रहा है। इससे स्कूलों का माहौल बेहतर हुआ है।

अभिभावकों की भागीदारी: चौथा जो महत्वपूर्ण काम दिल्ली सरकार ने किया है, वह है एसएमसी यानी अभिभावकों की भूमिका को स्कूलों में बढ़ाया गया है। आज मध्य प्रदेश में जो एक बड़ी समस्या है कि टीचर्स स्कूल पहुंचते ही नहीं हैं और कोई देखने वाला नहीं होता है। महीनों तक गांव के स्कूल बंद रहते हैं। राजनीतिक प्रभाव से शहरों की ओर ट्रांसफर कराए जाते हैं। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने बच्चों के माता-पिताओं और अभिभावकों को स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी में शामिल किया। 16 लोगों की कमेटी में अभिभावकों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है, यानी 12 अभिभावक इस कमेटी में हैं। उनके लिए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया है। हर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को 5 लाख रुपए का अनटाइड फंड दिया जाता है। बिजली, पानी, सुधार कार्य, शिक्षक की अंशकालिक नियुक्ति आदि जैसे कामों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

झूठ बोलती है शिवराज सिंह सरकार, फंड की नहीं है कमी
सुश्री आतिशी ने कहा कि इन कामों से दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों का कायापलट करके दिखा दिया है। अगर सरकारें वास्तव में बदलाव लाना चाहें तो इसमें बहुत समय नहीं लगता है। अगर मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह सरकार कहती है कि टीचर्स को पक्का करने के लिए उसके पास पैसा नहीं है, तो फिर वह झूठ बोल रही है। अगर वह कहती कि कमरे सुधारने के लिए पैसा नहीं है, तो वह झूठ बोल रही है। सरकारों के पास जरूरत से ज्यादा पैसा होता है। दिल्ली में हमारे अनुभव ने हमें सिखाया है। दिल्ली में सरकार बनी तो बजट 35 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 51 हजार करोड़ हो गया है क्योंकि अब टैक्स का पैसा सरकार के पास आ रहा है। अगर मध्य प्रदेश में सरकार पैसे की कमी की बात करती है, तो फिर यहां टैक्स का पैसा भाजपा के नेताओं मंत्रियों की जेब में जा रहा है। 15 साल सत्ता में रहने के बाद अगर शिवराज सिंह यह कहते हैं कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं हैं, तो यह मान लेना चाहिए कि उनकी नीयत इन सुविधाओं को ठीक करने की नहीं है।

मध्य प्रदेश में बनेगी आम आदमी पार्टी की सरकार, आलोक बनेंगे मुख्यमंत्री
उन्होंने कहा कि वे कहते हैं कि दिल्ली छोटा राज्य है, और मध्य प्रदेश बड़ा लेकिन मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार को पर्याप्त समय मिला है। अगर इसके बावजूद प्रदेश की जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली हैं, तो इसके लिए एकमात्र शिवराज सिंह चौहान जिम्मेदार हैं। इसलिए अब जनता ने यह ठान लिया है कि इस बार शिवराज सिंह चौहान को गद्दी से हटाना है और आम आदमी पार्टी को सत्ता में लाकर आलोक अग्रवाल को मुख्यमंत्री बनाना है। क्योंकि आम आदमी पार्टी ही एकमात्र पार्टी है जिसने दिल्ली में अपने वादों को पूरा करके दिखाया है। अगर साफ नीयत की सरकार आती है तो प्रशासन, स्कूल, अस्पताल की हालत को सुधारा जा सकता है। जिस तरह से दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में काम किया है, उसी तरह मध्य प्रदेश में आलोक अग्रवाल लंबे समय से प्रदेश में आम आदमी की लड़ाई लड़ रहे हैं। जैसे दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कयासों के विपरीत जाकर सरकार बनाई है, उसी तरह मध्य प्रदेश में आम आदममी पार्टी सरकार बनाएगी और आलोक अग्रवाल यहां मुख्यमंत्री बनेंगे।

सुनियोजित तरीके से भाजपा सरकार ने बर्बाद की एक पूरी पीढ़ी: आलोक अग्रवाल
इससे पहले आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि मध्य प्रदेश के हालात को समझने के लिए कुछ और आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। यहां 70 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है और 45 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। अगर खून की कमी और कुपोषण हो तो मानसिक विकास रुक जाता है और इसका असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है। इन हालात को दो तरीकों से समझना होगा एक तरफ तो मध्य प्रदेश में शिक्षा का ढांचा नहीं है, शिक्षा की मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, दूसरी तरफ बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है, जिससे उनका मानसिक विकास रुक रहा है। हमारा मानना है कि भ्रष्ट सत्ताएं नहीं चाहती कि प्रदेश के नागरिक शिक्षा हासिल करें क्योंकि एक शिक्षित नागरिक सवाल पूछता है और ये सरकारें सवाल से बचना चाहती हैं। भाजपा सरकार ने अपने 14 साल के शासन में सुनियोजित तरीके से शिक्षा को बदहाली की तरफ धकेला है जिससे एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो गई है।

मीडिया सेल
आम आदमी पार्टी, मध्य प्रदेश

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