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प्रेस रिलीज: 7 सितंबर 2018

सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया गया निर्माण पर प्रतिबंध राज्य सरकार की अक्षमता का सबूत: आलोक अग्रवाल
शीर्ष अदालत के हालिया फैसले पर आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने की तल्ख टिप्पणी

भोपाल, 7 सितंबर। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर राज्य सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि राज्य में सभी तरह की निर्माण गतिविधियों पर शीर्ष अदालत ने रोक लगाई है और यह सरकार की लापरवाही व भ्रष्टाचार का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पहले से ही बुरे हालात से गुजर रहा निर्माण क्षेत्र राज्य सरकार की नाकामी के कारण टूटने के कगार पर पहुंच जाएगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और एस अब्दुल नाज़ीर की एक खंडपीठ ने राज्य सरकार के सभी निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जरूरी किए गए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार ठोस अपशिष्ट के निपटान के लिए नीति पेश करने में विफल रही थी।
श्री अग्रवाल ने कहा कि निर्माण कार्यो पर रोक के अलावा सरकार पर शीर्ष अदालत ने नियमन में देरी के लिए तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत कोई नीति तैयार नहीं की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दो साल बाद भी नीति तैयार न करना सरकार की लापरवाही और अक्षमता की ओर इशारा करता है।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी मांग करती है कि तत्काल अपशिष्ट प्रबंधन की नीति बनाकर सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाए, ताकि निर्माण कार्य सुचारू रूप से हो सकें और प्रदेश के विकास की एक बाधा को दूर किया जा सके।
गौरतलब है कि अब इस मामले की सुनवाई अक्टूबर में होगी।

मीडिया सेल
आम आदमी पार्टी, मध्य प्रदेश

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sudhir